कविराज शरत (या शरत कविराज) राजस्थान पुलिस सेवा (RPS) के एक बेहद प्रतिष्ठित और वरिष्ठ अधिकारी हैं,
कविराज शरत (या शरत कविराज) राजस्थान पुलिस सेवा (RPS) के एक बेहद प्रतिष्ठित और वरिष्ठ अधिकारी हैं, जो वर्तमान में जोधपुर के पुलिस कमिश्नर (Police Commissioner of Jodhpur) के रूप में सेवाएं दे रहे हैं। कानून व्यवस्था को मजबूत बनाने, आधुनिक पुलिसिंग को बढ़ावा देने और जनता के बीच पुलिस की छवि को सुधारने में उनकी कार्यशैली की एक विशिष्ट पहचान है।
उनके जीवन और करियर से जुड़ी मुख्य जानकारियां नीचे दी गई हैं:
1. प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
मूल निवास: शरत कविराज मूल रूप से राजस्थान के ही रहने वाले हैं।
शिक्षा: उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा के दौरान तकनीकी और प्रशासनिक दोनों क्षेत्रों में गहरी रुचि दिखाई। वे अपने शांत, सुलझे हुए और विश्लेषणात्मक स्वभाव के लिए जाने जाते हैं।
2. पुलिस करियर और महत्वपूर्ण नियुक्तियां
शरत कविराज राजस्थान पुलिस के वरिष्ठ और अनुभवी अधिकारियों में गिने जाते हैं। अपने करियर में उन्होंने राज्य के कई जिलों और विभिन्न विभागों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं:
पुलिस अधीक्षक (SP) के रूप में: वे राजस्थान के कई जिलों (जैसे कोटा, झुंझुनू आदि) में पुलिस अधीक्षक (SP) के पद पर तैनात रहे, जहां उन्होंने अपराध नियंत्रण पर बेहतरीन काम किया।
SOG और ATS: उन्होंने राजस्थान पुलिस की 'स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप' (SOG) और 'एंटी टेररिस्ट स्क्वाड' (ATS) जैसे अत्यंत संवेदनशील और तकनीकी विभागों में भी अपनी सेवाएं दी हैं।
DIG और IG पद: पदोन्नति के बाद उन्होंने पुलिस उप-महानिरीक्षक (DIG) और फिर महानिरीक्षक (IG) के रूप में कार्य किया। जोधपुर कमिश्नर बनने से पहले वे जयपुर में 'स्टेट क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो' (SCRB) में भी अहम पद पर रहे।
वर्तमान पद (जोधपुर पुलिस कमिश्नर): वर्तमान में वे जोधपुर कमिश्नरेट के मुखिया (Police Commissioner) हैं, जहां वे शहर की सुरक्षा, ट्रैफिक व्यवस्था और सामुदायिक पुलिसिंग (Community Policing) को मजबूत करने पर काम कर रहे हैं।
3. कार्यशैली और प्रमुख उपलब्धियां
साइबर क्राइम और तकनीकी विशेषज्ञता: शरत कविराज को राजस्थान पुलिस में तकनीक और आधुनिक टूल्स के इस्तेमाल को बढ़ावा देने वाले अधिकारियों में अग्रणी माना जाता है। साइबर अपराधों को रोकने और पुलिसिंग में डिजिटल डेटा के इस्तेमाल को लेकर उनका काम काफी सराहनीय रहा है।
कम्युनिटी पुलिसिंग: वे आम जनता और पुलिस के बीच की दूरी को कम करने में विश्वास रखते हैं। जोधपुर में तैनाती के दौरान उन्होंने युवाओं, व्यापारियों और आम नागरिकों के साथ संवाद बढ़ाने के कई कार्यक्रम शुरू किए हैं।
सख्त और निष्पक्ष छवि: वे अपनी साफ-सुथरी और कड़क कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं। अपराधियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाने और फरियादियों की बात संवेदनशीलता से सुनने के कारण उनकी एक मजबूत प्रशासनिक साख है।
4. सम्मान और पुरस्कार
उनकी उत्कृष्ट और निष्ठावान सेवाओं के लिए उन्हें समय-समय पर राज्य सरकार और पुलिस विभाग द्वारा सम्मानित किया जा चुका है, जिसमें सराहनीय सेवा पदक (Meritorious Service Medal) भी शामिल है।
5. पुलिसिंग में तकनीकी नवाचार (Technical Innovations)
शरत कविराज को राजस्थान पुलिस के सबसे "Tech-Savvy" (तकनीक प्रेमी) अधिकारियों में गिना जाता है। उन्होंने पुलिसिंग को आधुनिक बनाने के लिए कई काम किए हैं:
डेटा और SCRB में योगदान: स्टेट क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (SCRB) में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने अपराधियों का डिजिटल डेटाबेस तैयार करने और उसे थानों से जोड़ने में बड़ी भूमिका निभाई।
साइबर सुरक्षा: वे अक्सर आम जनता, विशेषकर युवाओं और छात्रों को साइबर ठगी से बचने के लिए जागरूक करते रहते हैं। उनका मानना है कि आधुनिक दौर के अपराधों से निपटने के लिए पुलिस को अपराधियों से दो कदम आगे डिजिटल रूप से सोचना होगा।
6. जोधपुर कमिश्नरेट में हालिया पहल और प्राथमिकताएं
जोधपुर पुलिस कमिश्नर का पद संभालने के बाद से उनकी कार्यप्रणाली में कुछ खास बदलाव देखने को मिले हैं:
अवैध मादक पदार्थों और गैंगस्टर्स पर प्रहार: पश्चिमी राजस्थान (जोधपुर, बाड़मेर, जालोर बेल्ट) में ड्रग्स की तस्करी और लोकल गैंग्स के खिलाफ उन्होंने एक बड़ा अभियान छेड़ रखा है। अपराधियों की संपत्तियों की जांच और उनकी धरपकड़ के लिए वे सख्त निर्देश जारी करते रहे हैं।
महिला सुरक्षा और 'गरिमा हेल्पलाइन': महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा उनकी प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर है। मनचलों और छेड़छाड़ करने वाले असामाजिक तत्वों के खिलाफ उन्होंने सादे कपड़ों में पुलिसकर्मियों (विशेषकर महिला पुलिसकर्मियों) की तैनाती बढ़ाई है।
ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार: जोधपुर की ऐतिहासिक और तंग गलियों के साथ-साथ मुख्य सड़कों पर ट्रैफिक जाम की समस्या से निपटने के लिए वे अक्सर खुद फील्ड में उतरकर रूट प्लान और सीसीटीवी (CCTV) मॉनिटरिंग का जायजा लेते हैं।
7. सुलभ और संवेदनशील व्यक्तित्व
अक्सर बड़े पुलिस अधिकारियों की छवि सख्त और दूर रहने वाली होती है, लेकिन शरत कविराज इसके विपरीत हैं:
ओपन-डोर पॉलिसी: वे आम फरियादियों से सीधे मिलने और उनकी समस्याओं को सुनने के लिए जाने जाते हैं। उनका प्रयास रहता है कि किसी भी पीड़ित को न्याय के लिए थानों के चक्कर न काटने पड़ें।
मीडिया के साथ बेहतर समन्वय: एक कुशल प्रशासनिक अधिकारी के रूप में, वे मीडिया के साथ भी बहुत पारदर्शी और संतुलित समन्वय रखते हैं। किसी भी बड़ी घटना या कानून-व्यवस्था की स्थिति पर वे खुद आकर सही तथ्य जनता के सामने रखते हैं, जिससे अफवाहों पर लगाम लगती है।8. सोशल मीडिया और डिजिटल कनेक्टिविटी
वे इस बात के प्रबल समर्थक हैं कि पुलिस को उस प्लेटफॉर्म पर मौजूद होना चाहिए जहाँ आज की युवा पीढ़ी है।
सीधा संवाद: जोधपुर कमिश्नर के रूप में उन्होंने सोशल मीडिया (X, इंस्टाग्राम और फेसबुक) पर पुलिस के रिस्पॉन्स टाइम को बहुत तेज करवाया है। अगर कोई नागरिक सोशल मीडिया पर किसी समस्या या शिकायत को टैग करता है, तो उनकी आईटी टीम तुरंत एक्टिव होकर संबंधित थाने को कार्रवाई के निर्देश देती है।
सकारात्मक छवि: वे केवल अपराध की खबरें ही नहीं, बल्कि पुलिस द्वारा किए गए मानवीय कार्यों और समाज सेवा की कहानियों को भी जनता के सामने लाते हैं, ताकि पुलिस का एक मानवीय चेहरा (Humane Face) सामने आ सके।
9. पुलिसिंग के साथ-साथ सामाजिक सरोकार
शरत कविराज केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं रहते, बल्कि वे सामाजिक बुराइयों को दूर करने के लिए पुलिस की भूमिका को महत्वपूर्ण मानते हैं:
नशामुक्ति अभियान: जोधपुर और आस-पास के क्षेत्रों में युवाओं में बढ़ते नशे के चलन को रोकने के लिए वे न केवल तस्करों को पकड़वा रहे हैं, बल्कि स्कूल-कॉलेजों में जागरूकता सेमिनार और काउंसलिंग सेशन भी आयोजित करवा रहे हैं।
कम्युनिटी विंग्स की सक्रियता: उन्होंने सीएलजी (Community Liaison Group) और सुरक्षा सखियों (महिला सुरक्षा समूह) की बैठकों को नियमित किया है ताकि जमीनी स्तर पर जनता की आवाज सीधे उन तक पहुँच सके।
10. चुनौतियों से निपटने का शांत तरीका (Crisis Management)
एक पुलिस कमिश्नर के रूप में उनके सामने कई बार कानून-व्यवस्था, सांप्रदायिक तनाव या बड़े विरोध-प्रदर्शनों जैसी गंभीर स्थितियां आती हैं। ऐसे समय में उनका रुख:
संवाद से समाधान: वे बल प्रयोग करने के बजाय दोनों पक्षों या आंदोलनकारियों के प्रतिनिधियों से खुद सीधे बैठकर बात करने (Dialogue) को प्राथमिकता देते हैं।
फील्ड में मौजूदगी: किसी भी संवेदनशील स्थिति में वे केवल दफ्तर में बैठकर आदेश नहीं देते, बल्कि खुद मौके पर (Ground Zero) मौजूद रहकर पुलिस बल का नेतृत्व करते हैं, जिससे मातहत कर्मचारियों का मनोबल भी बढ़ता है।
11. प्रशासनिक साख और साथी अधिकारियों में सम्मान
राजस्थान पुलिस महकमे में उन्हें एक ऐसे 'थिंक टैंक' (Think Tank) के रूप में देखा जाता है जो किसी भी जटिल समस्या का व्यावहारिक और तकनीकी समाधान निकाल सकता है। वे जूनियर अधिकारियों को सिखाने और उन्हें बेहतर काम करने के लिए प्रेरित करने (Mentorship) के लिए भी जाने जाते हैं।
12. अपराधियों में डर, आमजन में विश्वास (सख्त पुलिसिंग)
जोधपुर कमिश्नर के रूप में उनका एक स्पष्ट संदेश रहा है—"अपराधियों के लिए कोई नरमी नहीं।"
हिस्ट्रीशीटरों पर नकेल: उन्होंने शहर के सभी थानों को अपने-अपने क्षेत्रों के टॉप अपराधियों, हिस्ट्रीशीटरों और जेल से छूटे बदमाशों की दैनिक निगरानी (Daily Monitoring) करने के सख्त निर्देश दिए हैं।
अवैध हथियारों के खिलाफ अभियान: जोधपुर और आस-पास के ग्रामीण इलाकों से जुड़े नेटवर्क पर नजर रखते हुए उन्होंने अवैध हथियारों (आर्म्स एक्ट) और अवैध वसूली (Extortion) करने वाले गैंग्स के खिलाफ धरपकड़ बहुत तेज करवाई है।
13. पुलिस थानों का आधुनिकीकरण और वर्क कल्चर
वे केवल बाहर की पुलिसिंग नहीं सुधार रहे, बल्कि पुलिस महकमे के अंदरूनी माहौल को भी बेहतर बना रहे हैं:
स्मार्ट थाने: उनका विज़न थानों को अधिक रिसेप्शन-फ्रेंडली बनाना है, ताकि जब कोई पीड़ित (विशेषकर महिलाएं या बुजुर्ग) थाने आए, तो उसे डर न लगे।
जवानों की वेलफेयर: पुलिसकर्मियों के तनाव को कम करने के लिए वे समय-समय पर खेलकूद प्रतियोगिताओं, स्वास्थ्य शिविरों और साप्ताहिक अवकाश के नियमों को सही तरीके से लागू करने पर जोर देते हैं, क्योंकि उनका मानना है कि एक तनावमुक्त पुलिसकर्मी ही जनता से अच्छा व्यवहार कर सकता है।
14. वीआईपी सुरक्षा और बड़े आयोजनों का कुशल प्रबंधन
जोधपुर एक बड़ा पर्यटन केंद्र होने के साथ-साथ मुख्यमंत्री, राज्यपाल और देश-विदेश के कई वीआईपी (VIPs) के मूवमेंट का केंद्र रहता है।
बिना पैनिक के सुरक्षा: शरत कविराज जी के नेतृत्व में पुलिस की वीआईपी सुरक्षा व्यवस्था इस तरह प्लान की जाती है कि सुरक्षा भी पूरी रहे और आम जनता को ट्रैफिक जाम या रास्ते बंद होने की वजह से कम से कम परेशानी का सामना करना पड़े।
15. युवाओं के लिए संदेश और प्रेरणा
वे अक्सर शैक्षणिक संस्थानों के कार्यक्रमों में शामिल होते हैं और युवाओं से सीधे संवाद करते हैं। उनका कहना होता है कि:
"शॉर्टकट के चक्कर में या सोशल मीडिया पर रील्स देखकर हथियारों और अपराधियों की तरफ आकर्षित होने वाले युवा अपना भविष्य बर्बाद कर रहे हैं। ताकत कानून का पालन करने और समाज को आगे बढ़ाने में है, कानून तोड़ने में नहीं।"
16. 'इंटेलिजेंस-बेस्ड' ऑपरेशन्सवे पारंपरिक पुलिसिंग के साथ-साथ मुखबिर तंत्र (Informer Network) और तकनीकी इंटेलिजेंस के मिश्रण पर बहुत भरोसा करते हैं।
रात की गश्त (Night Patrolling): उन्होंने शहर के संवेदनशील इलाकों, हाइवे एंट्री पॉइंट्स और संकरी गलियों में रात की गश्त को पूरी तरह से री-शेड्यूल किया है। वे खुद आधी रात को अचानक किसी भी नाके या थाने का औचक निरीक्षण (Surprise Inspection) करने पहुंच जाते हैं, जिससे फील्ड में तैनात पुलिसकर्मी हमेशा अलर्ट रहते हैं।
संदेहास्पद संपत्तियों पर नज़र: पश्चिमी राजस्थान में अक्सर यह देखा गया है कि अपराधी अपराध की कमाई से आलीशान जीवन जीते हैं। शरत कविराज जी ने ऐसे अपराधियों की आर्थिक कमर तोड़ने के लिए राजस्व और अन्य विभागों के साथ तालमेल बिठाकर उनकी अवैध संपत्तियों को फ्रीज या ध्वस्त करने की कार्रवाई को गति दी है।
17. कम्युनिटी के साथ "डिजिटल बीट" सिस्टमउन्होंने पारंपरिक 'बीट सिस्टम' (जहां एक कांस्टेबल को एक मोहल्ले या इलाके की जिम्मेदारी मिलती है) को डिजिटल रूप दिया है।
हर बीट कांस्टेबल को अपने इलाके के प्रमुख नागरिकों, दुकानदारों, और वाट्सएप ग्रुप्स से जोड़ा गया है।
इससे फायदा यह होता है कि अगर किसी इलाके में कोई संदिग्ध व्यक्ति घूम रहा हो या कोई नई समस्या पनप रही हो, तो उसकी जानकारी तुरंत पुलिस तक पहुंच जाती है और मामला बड़ा होने से पहले ही संभाल लिया जाता है।
18. टूरिज्म पुलिसिंग पर विशेष ध्यानचूंकि जोधपुर (सूर्यनगरी) विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है और यहाँ हर साल लाखों देशी-विदेशी पर्यटक आते हैं:
लपका गैंग पर कड़ाई: पर्यटकों को परेशान करने वाले गाइडों, ऑटो चालकों या 'लपका गैंग' (ठगों) के खिलाफ उन्होंने विशेष अभियान चलाया है।
टूरिस्ट फ्रेंडली व्यवहार: प्रमुख ऐतिहासिक स्थलों (जैसे मेहरानगढ़, उम्मेद भवन, मंडोर गार्डन) के आस-पास तैनात पुलिसकर्मियों को विशेष रूप से सॉफ्ट स्किल्स और पर्यटकों की मदद करने के लिए ट्रेंड किया गया है ताकि जोधपुर की छवि वैश्विक स्तर पर और बेहतर हो।
19. पुलिस बेड़े में पारदर्शिता और अनुशासनवे भ्रष्टाचार और लापरवाही के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति रखते हैं। अगर किसी पुलिसकर्मी या अधिकारी के खिलाफ शिकायत मिलती है या जनता के साथ दुर्व्यवहार का मामला सामने आता है, तो वे तुरंत विभागीय जांच बैठाकर सख्त एक्शन (लाइन हाजिर या सस्पेंशन) लेने से नहीं हिचकिचाते। उनका मानना है कि पुलिस को दूसरों को सुधारने से पहले खुद पूरी तरह अनुशासित दिखना होगा।
शरत कविराज जी के बारे में यह व्यापक जानकारी उनके एक कुशल, दूरदर्शी और जमीन से जुड़े पुलिस अधिकारी होने की पुष्टि करती है।


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